मैं वापस घर को आऊँगी

आज नही तो कल
एक दिन मैं घर जाऊँगी
धीरे धीरे बन्धन खोल
मैं साजन से मिल पाऊँगी

उसके प्रेम में रम के खिंच
एक धार मैं बन जाऊँगी
चलते चलते एक दिन मैं
उन्न चरणो में झुक जाऊँगी

हाँ, आज नही तो कल…
मैं वापस घर को आऊँगी

God has written everyone’s life story with his own hand, having regrets or complaining about it means we are accusing him of being wrong.

मुझको जोड दे

दिया मुझको बहुत तूने
पर थोडा सा कुछ और दे
जो टूटे थे टुकडे मेरे
समेट उनको जोड दे

जब बिखरे थे सपने सारे
तब भी सर झुकाया था
तेरे दर पर खडी थी हरदम
चाहे माथे कुछ भी लगाया था

माँगा नही कुछ अब तक
आज भी कोइ ज़ोर नही
तेरे रसते से हटके रब्बा
मेरे रस्ते, और कोइ मोड नहीं

झुकना जो तेरे चरणो पे
उस राह मुझको छोड दे
तुझ तक आने को रब्बा
फिर – एक बार मुझको जोड दे