ऐ खुदा, भर मेरा दिल
अपनी मोहब्बत की सिसकियों से कुछ इस तरह
की किसी और के बसने की कोई गुंजाइश ही न रहे

तेरी स्याही की उल्फत देख, मेरा कलम कुछ शर्मा गया
अब क्या लिखूँ नगम कोई, जो तेरे गीतों से बतला सके

तेरे ख़त मुझसे खफ़ा हैं, या तुम कुछ नाराज़ हो गए ?
संदेस मिलते नही मेरे, या खुद ही अब बेज़ार हो गए ?

बिन अक्षर वोह उड़ते पन्ने,
और कलम की सूखी हुई स्याई
सुना चली वोह अनसुनी दास्तां
जो हम केह के भी केह ना सके

आये नही हम वादा कर, पर इंतज़ार तुमनॆ भी ना किया
इश्क मुलाकात मे तब है, जब कोइ राह देख रहा हो

कया गिला करूँ तुझसे
रूठते तो अपनो से है

वफ़ा कर ना पाए तुम, हर्ज नही
अब थोड़ी बेवफ़ाई ही कर लो

है इरादा कुछ, ईशारा तो समझें
कि मेरे अलफ़ज़ कुछ और केहते हैं
और आवाज़ कुछ और 

Like a twinkle in your eye, these drops falling from the sky…
At times hiding and shy, then tapping, dancing and high…
…Yes drops falling from the sky, like a twinkle in your eye…

I live like there is no tomorrow.
I love like there is no room for sorrow.
I wanna end when no more dreams I need to borrow.